कई घरों की छीनी खुशियां

गुलाबी शहर के धमाके

आतंकवाद से निपटना हमारी प्राथमिकता क्यों नहीं

आतंकवादियों के खतरनाक इरादे

 

कई घरों की छीनी खुशियां

भगवान के दर से नहीं लौटी डिंपल

जयपुर (श्याम सुंदर शर्मा/एसएनबी)। जयपुर गुर्जर की थड़ी निवासी 28 वर्षीय श्रीमती डिंपल को यह पता नहीं था कि वे मंगलवार को सांगानेरी गेट के बाहर स्थित हनुमान मंदिर में अपनी मन्नत पूरी करने के लिए पूजा-अर्चना के बाद वापस अपने घर नहीं लौट पाएगी और बम विस्फोट में दुनिया से चली जाएगी। सवाई मानसिंह अस्पताल में कल रात से मुर्दाघर में शिनाख्त के अभाव में पड़े डिंपल के शव को आज उसके पति यशवंत ने पहचान लिया।

यशवंत ने रोते हुए कहा कि मेरी पत्नी तो मुझे यह कहकर आई थी कि आप तो भगवान के दर्शन करने जाते नही हो मैं अपनी मुराद पूरी करने के लिए पंडित के कहने पर मंगलवार की आरती में शामिल होने जा रही हूं और रात को ही लौट आऊंगी पर रात को डिंपल नही लौटी तो उन्हें चिंता सताने लगी कि आखिर डिंपल गई कहां? पूरी रात इसी चिंता में डूबा रहा कि डिंपल सुबह आ ही जाएगी। जब सुबह डिंपल नही लौटी तो उसके दोस्त विष्णु ने बताया कि उसकी पत्नी की मौत बम विस्फोट में हो गई है और उसका शव एसएमएस अस्पताल के मुर्दाघर में रखा गया है। वे दौड़ा-दौड़ा अपने मित्र के साथ अस्पताल पहुंचा तो हक्का-बक्का रह गया कि उसकी पत्नी डिंपल का शव शिनाख्त की अभाव में मुर्दाघर में पड़ा हुआ है।

हिम्मत जुटाकर यशवंत ने डॉक्टर विजय से कहा कि मुर्दाघर में जिस महिला का शव है वह उसकी पत्नी है और उसकी पत्नी का शव उसे सौंप दिया जाए। मुर्दाघर पर मौजूद एएसआई सत्येंद्र ने यशवंत से उसकी पत्नी का प्रमाण मांगा इस पर यशंवत ने अपने घर से राशन कार्ड की प्रति लाकर सौंपी उसके बाद ही वे अपनी पत्नी का शव अंत्येष्टि के लिए ले जा सका।

यशवंत ने रोते हुए संवाददाता को बताया कि मुझे यह पता होता कि बम विस्फोट में मेरी डिंपल हमेशा के लिए छिन जाएगी तो मैं उसे जाने ही नही देता पर प्रभु के आगे किसी की चलती नही है। मेरी संगनी हमेशा-हमेशा के लिए इस संसार से विदा हो गई है। अब मेरी दो जुड़वा बेटियों को कौन पालेगा उन पर तो मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है। अब मैं उन्हें कैसे दिलासा दिलाऊंगा कि उनकी मम्मी उनके पास कभी नही आएगी। रातभर तो मैं अपनी बेटियों को यही दिलासा दिला रहा था कि उनकी मां विस्फोट के कारण चारदीवारी इलाके में कही रह गई होगी और सुबह होते ही घर लौट आएगी पर अब तो यह दिलासा भी समाप्त हो गया है।

मुट्ठी में प्रसाद लिए संसार से विदा हो गई इरा

बम धमाके में मारी गई दस साल की मासूम इरा को तनिक भी अहसास नहीं था कि कुछ पल पूर्व ही भगवान का लिया प्रसाद अपने मुंह में भी नहीं रख पाएगी और सदा के लिए इस संसार से विदा हो जाएगी। इरा का यह दुर्भाग्य रहा कि हाथ में लिया प्रसाद मुंह में रखती इससे पहले ही आतंकवादी षड्यंत्र का शिकार हो गई। इरा प्रसाद का सेवन करती इससे पहले ही बम धमाके ने उसकी जान ले ली। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि असमय ही संसार से विदा ले चुकी इरा की मुट्ठी में प्रसाद दबा हुआ था। इरा का जिसने भी नजदीक से शव देखा और जब उन्हें बताया गया कि उसकी मुट्ठी में प्रसाद दबा हुआ है तो वह अपनी रूलाई नहीं रोक सका। इरा की मौत बालाजी मंदिर के निकट हुए बम विस्फोट में हुई।

मोहनलाल के परिवार में नहीं रहा कोई कमाने वाला

मोहनलाल के परिवार में कोई कमाने वाला ही नहीं रहा। मोहनलाल और उनका बेटा गौरव मंगलवार शाम शहर में हुए सिलसिलेवार बम धमाके में मारे गए। दोनों बाप-बेटे चांदपोल गेट स्थित हनुमान मंदिर के बाहर प्रसाद बेचकर परिवार का पेट पाल रहे थे। मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ थी। बाप-बेटे प्रसाद बेचने में मशगूल थे। ठीक सात बजकर 22 मिनट पर पास ही खड़ी एक हीरो रेंजर साइकिल में जोरदार धमाका हुआ और दोनों बाप-बेटे दहशतगर्दों की काली करतूत का शिकार हो गए। गौरव के दो छोटे मासूम बच्चे हर्षित (4) और नन्दन डेढ़ साल का है।

किसी ने मेरे संचित को देखा क्या !

सवाई मानसिंह अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती एक बुजुर्ग महिला की निगाहें अपने बेटे संचित को तलाश रहीं थीं। अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और पुलिसकर्मियों में से जो भी उसे मिलता, यह वृद्धा बेटे का हुलिया बताते हुए उनसे पूछने लगती थी किसी ने मेरे संचित को देखा क्या?अनेक बार पूछने पर भी जब उसे कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो फर्श पर घायल पडे़ एक बालक के लिए उसकी ममता उमड़ पड़ी और अपने आंचल से वह बच्चे को हवा करने लगी। अपने संचित के नहीं मिलने से उसके आंखों में आंसू तो थे लेकिन शायद दूसरे के बच्चे में अपने लाल की छवि देखकर वह अपना फर्ज निभा रही थी।

पूरा नहीं हुआ इंजीनियर बनने का ख्याब

इंजीनियर बनने का सपना लिए जयपुर आए बिहार के सिवान निवासी 21 वर्षीय छात्र अमरिन्दर चौहान को यह पता नहीं था कि वे जिस हनुमान मंदिर में दर्शन करने जा रहा है वहां से कभी नहीं लौटेगा। मंगलवार की शाम करीब सात बजे अमरिन्दर अपने मित्रों के साथ हवामहल के नीचे स्थित हनुमान जी के मंदिर में गया ही था कि 7.35 बजे एक भीषण धमाका हुआ और उस धमाके में उसके शरीर पर छर्रे लगे और वे वहीं पर ढ़ेर हो गया। अमरिन्दर जयपुर में स्थित कूकस के शंकरा इंजीनियरिंग कॉलेज का छात्र था और यहां हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा था। अमरिन्दर चौहान के माता-पिता वर्तमान में दिल्ली में है और अमरिन्दर के मित्रों उन तक सूचना पहुंचा दी है कि उनका पुत्र अब इस दुनिया में नहीं रहा। देर रात तक उसके माता-पिता जयपुर नहीं पहुंचा पाए थे।

बिना शिनाख्त के पड़े हैं 12 भिखारियों के शव

सवाई मानसिंह अस्पताल के मुर्दाघर में लगभग एक दर्जन भिखारियों के शव शिनाख्त के अभाव में 24 घंटे से पड़े हुए हैं। जिला और अस्पताल प्रशासन अभी तक यह पता नहीं लगा पाया है कि यह भिखारी कहा के हैं। इस कारण अब प्रशासन के लिए इन भिखारियों के शवों को रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो गया है। मंगलवार को हनुमान मंदिर के बाहर ये भिखारी इस आस में डेरा जमाए हुए थे कि उन्हें प्रसाद के रूप में अच्छे पकवान और भीख में अच्छा पैसा मिलेगा पर उन्हें यह पता नहीं था कि आज उन्हें कुछ मिलने की बजाय मौत मिलेगी। स्वयंसेवियों का कहना था कि उन्हें पता नही है कि यह शव किनके है पर हर कोई यही कहता नजर आ रहा था कि इनके पास जिस तरह का सामान मिला है उससे स्पष्ट हो रहा है कि यह भिखारी ही हैं। कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं ने यह घोषणा की कि वे इन भिखारियों की विधिवत अंत्येष्टि करनी की जिम्मेदारी निर्वाह करने के लिए तैयार है।

गुलाबी नगरी में पसरा है खौफ व सन्नाटा

मंगलवार की शाम एक के बाद एक आठ बम विस्फोटों से लहुलुहान हुई गुलाबी नगरी जयपुर में आज खौफ व सन्नाटा पसरा हुआ है। जिले की सड़कों पर आज न तो पहले की तरह यातायात है और न ही पर्यटकों की हलचल नजर आ रही है। खाकी वर्दी पहने पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल रक्तरंजित सड़कों पर गश्त कर रहे हैं। जिले के 15 पुलिस थाना इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया है। ऐसा लग रहा है मानो पूरे शहर में कर्फ्यू लगा हो। श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों की दहशत व सदमे से लोग उबर नहीं पाए हैं। विस्फोटों में 60 से अधिक लोग मारे गए हैं और 100 से ज्यादा घायल हुए हैं। फारेन्सिक अधिकारियों को पुलिसकर्मियों के साथ विस्फोट स्थलों की जांच कर सबूत एकत्र करते देखा गया। शहर की सीमा पर अवरोधक हैं। शहर में प्रवेश करने वाले तथा बाहर जाने वाले वाहनों की विस्तृत जांच की जा रही है।

लियाकत के घर से एक साथ उठे तीन जनाजे

वे तीन बहनें ताऊ की मौत पर जयपुर आई थी लेकिन खुद ही मंगलवार शाम हुए बम धमाकों में मौत का शिकार हो गईं। किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक घर से एक साथ तीन बहनों की अर्थी उठेगी।

मुंबई की 14 वर्षीय असीमा, 10 वर्षीय एनी और उनकी बड़ी बहन सुमेरा ताऊ की मौत पर दो दिन पहले ही जयपुर आई थी। मंगलवार शाम जौहरी बाजार स्थित नेशनल हैण्डलूम के बाहर एक पतासे की ठेली के पास हुए हुए बम विस्फोट में तीनों की मौत हो गई। घी वालों के रास्ते में रहने वाले उनके चाचा मुजफ्फर के अनुसार तीनों बहनें हैण्डलूम हाउस में खरीदारी करने गई हुई थी। इनके साथ सुमेरा की बच्ची सुहाना भी थी जो धमाके में घायल हो गई और अब भी अस्पताल में भर्ती है। इस दोहरे हादसे से मुजफ्फर के परिवार में ही नहीं पूरे मोहल्ले में मातम पसरा हुआ है तो उनकी मां आसिया पछाड़ें खा-खाकर उस घड़ी को कोस रही है जब उसने मुंबई से जयपुर आने का फैसला किया था। तीन बेटियों को एक साथ खोने से गमजदा आसिया बेटियों को याद कर बार-बार बेहोश हो जाती है तो पति लियाकत और बेटे सिकंदर भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे।

आदर्श नगर में धन्नादास की बगीची में रहने वाले लियाकत के घर आज सुबह से ही भारी भीड़ थी। घर से एक साथ तीन अर्थियां उठी तो समूचे मोहल्ले में चीख-पुकार मच गई। जिसने भी इस मंजर को देखा वह अपने आंसू नहीं रोक पाया। इससे कुदरत का खिलवाड़ कहें या बदनसीबी कि भाई सिकंदर को एक साथ तीन बहनों की अर्थी को कंधा देना पड़ा। उसकी आंखों से टपकते आंसुओं से बहनों की मौत का गम साफ झलक रहा था।

पीड़ितों के घावों पर राहत का मरहम

मंगलवार को शहर में हुए श्रंखलाबद्ध बम विस्फोटों में मारे गए लोगों के आश्रितों को आज मंत्रिमंडल के सदस्यों ने घर-घर जाकर पांच-पांच लाख रूपए की सहायता राशि वितरित की।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के निर्देश पर खाघ मंत्री घनश्याम तिवाड़ी, शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ, पंचायती राज मंत्री कालूलाल गुर्जर, सार्वजनिक निर्माण मंत्री राजेन्द्र राठौड़, जल संसाधन मंत्री सांवरलाल जाट, सहकारिता मंत्री नाथूसिंह गुर्जर, खान मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे, उघोग मंत्री डॉ. दिगम्बर सिंह, श्रम मंत्री रामकिशोर मीणा, राजस्व मंत्री रामनारायण डूंडी, नंदलाल मीणा और सरकारी मुख्य सचेतक महावीर जैन ने घर-घर जाकर मुख्यमंत्री सहायता कोष से पांच-पांच लाख रूपए की राशि का चेक मृतकों के आश्रितों को सौंपे। खाघ मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने बम विस्फोट में मारे गए राधेश्याम यादव, इकबाल अहमद, अजय गर्ग, राजकुमार, कानाराम और किशन के आश्रितों को चेक सौंपा तो शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ ने विजय कुमार गुप्ता, नरेन्द्र कुमार तंवर, मुरलीधर, शहनवाज व सुश्री कौशल्या धवन के आश्रितों को उनके घर जाकर चेक सौंपा। पंचायती राज मंत्री कालूलाल गुर्जर ने दीपक सैनी के आश्रितों को तो सरकारी मुख्य सचेतक महावीर प्रसाद जैन ने टोंक जिले आशाराम गुर्जर, रामकिशोर मीणा ने श्रीमती भगवती देवी, सुश्री अश्मा खान, श्रीमती सुमेरा खान व सुश्री एनी खान के परिजनों को चेक सौंपा। इसी प्रकार खान मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे ने सुश्री अरीना, ताराचंद, हरीश, मुकेश कुमार व शुभम उर्फ कान्हा कुमार के परिजनों को चेक दिया। उघोग मंत्री डॉ. दिगम्बर सिंह ने बम विस्फोट में शहीद हुए पुलिसकर्मी दीपक यादव, भारत भूषण और महेन्द्र कुमार के आश्रितों को उनके घर जाकर पांच लाख रूपए का चेक सौंपा।

राजस्व मंत्री रामनारायण डूडी ने मधुर अरोड़ा व मालाराम के आश्रितों को तो सार्वजनिक निर्माण मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने श्री जावेद, सुश्री महक डंगायच, सुश्री दिया डंगायच, गोपाल सिंह, घनश्याम व पुनीत सोनी के परिजनों को चेक सौंपे। सहकारिता मंत्री डॉ. नाथूसिंह गुर्जर ने गौरव शर्मा, मोहन लाल शर्मा, रामसेवक दास, प्रबल प्रताप सिंह, रमेश कुमार व मुन्ना के परिजनों को चेक सौंपा तो जल संसाधन मंत्री सांवर लाल जाट ने श्रीमती मैना, श्रीमती बानो और नंदलाल मीणा ने सुश्री सावित्री देवी, मदन लाल बांगड़ा चमनलाल व रामू प्रजापत के आश्रितों को पांच-पांच लाख रूपए के चेक सौंपा।

विस्फोट स्थल बयां कर रहे हैं तबाही का मंजर

हनुमानजी मंदिर के दाहिनी आ॓र प्रसाद वाले की दुकान के पास विस्फोट हुआ है। एक नई साइकिल के दो टुकड़े पड़े हैं। एक रिक्शा उल्टा पड़ा है। करीब 30 फुट के दायरे में खून बिखरा है। प्रत्यक्षदर्शी मंदिर के पुजारी आ॓मप्रकाश शर्मा ने बताया कि शाम करीब 7:30 बजे मंदिर में दर्शनार्थियों का तांता लगा हुआ था। हम सभी आठ बजे की आरती की तैयारी कर रहे थे। अचानक धमाका हुआ। प्रसाद वाले, पान की दुकान लगाने वाली मुरली, पुलिसकर्मी शाहनवाज आदि बुरी तरह घायल हो गए। यहीं स्थित एक दुकानदार महेश शर्मा ने बताया कि शाम को जैसे ही धमाका हुआ, एकबारगी तो बाजार थम सा गया। बाजार में खरीदारी करने आए रमाकांत गोयल ने बताया कि विस्फोट के बाद मची भगदड़ में उनका पूरा परिवार बिछुड़ गया।

जयपुर विस्फोटों में मरने वालों की सूची

जयपुर। श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों में मारे गए लोगों में से 56 के शव सवाई मानसिंह अस्पताल में हैं। इनमें से 42 की पहचान हो चुकी है। शेष 14 की शिनाख्त बाकी है।

जिन मृतकों की शिनाख्त हो चुकी है, उनके नाम इस प्रकार हैं : मैना, बानो और भारत भूषण (सभी सीकर), हरीश और सुमेरा रंजन (ब्रह्मपुरी जयपुर), कुमारी रेशमा, एनी खान, इकबाल अहमद, भगवती देवी, राम प्रसाद, विजय कुमार गुप्ता, ताराशंकर, प्रबल प्रताप, चमनलाल बागड़ा, सावित्री देवी, नरेंद्र कुमार तंवर, किशन कुमार, पुनीत सोनी, महक डगायच, दिया डगायच, जावेद, रामसेवक, मोहनलाल शर्मा, गौरव शर्मा, राधेश्याम यादव, मुरलीधर, मदनलाल, मुकेश कुमार, कान्हाराम, कान्स्टेबल शाहनवाज, कुमारी इरा (उम्र 10 साल), कौशल्या देवी, हनीफ खान, रामसेवक दास और दीपक सैनी (सभी जयपुर), गोपाल सिंह (सांभर), आशा राम (टोंक), महेंद्र कुमार सेन और दीपक यादव (अलवर), रामू प्रजापत और संदीप पासवान (बिहार) तथा रमेश चौहान (गोंडा।