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शिवानी भटनागर हत्याकांड 9 साल बाद मिला न्याय डर व तनाव था शर्मा के चेहरे पर |
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सहारा न्यूज ब्यूरो
शिवानी के चरित्र पर कीचड़ उछालने पर कोर्ट सख्त प्रभात कुमार नई दिल्ली, 20 मार्च। शिवानी भटनागर हत्याकांड की सुनवाई के दौरान अभियुक्तों द्वारा उसके चरित्र पर कीचड़ उछाले जाने को अदालत ने काफी गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इस पर बचाव पक्ष की खिंचाई करते हुए कहा कि यह पुरूष प्रधान समाज की छोटी मानसिकता का परिचायक है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार शास्त्री ने यह टिप्पणी बचाव पक्ष के उस दलील पर की, जिसमें कहा गया था कि शिवानी अपने कैरियर को लेकर काफी जूनुनी (क्रेजी) थी और किसी भी हद तक जाने को तैयार थी। साथ ही कहा कि इसके लिए उसने उच्च अधिकारियों से संपर्क बनाना शुरू कर दिया था और सब कुछ बहुत जल्द ही पा लेना चाहती है। बचाव पक्ष ने कहा था कि इसलिए उसने अपने से काफी बड़े उम्र के व्यक्ति से शादी भी की थी। बचाव पक्ष की इस दलील पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हम 21 वीं सदी में पहुचने के बाद भी पुरूष प्रधानता की बात से उपर नहीं उठ पाए हैं। कोर्ट ने कहा कि उसने किससे शादी की और क्यों की, यह उसकी निजी स्वतंत्रता थी और लोगों को इस पर उंगली उठाने का कोई हक नहीं है। शर्मा को बचाने को दी झूठी गवाही, अब नोटिस नई दिल्ली, 20 मार्च (एसएनबी)। अपने दोस्त को बचाने के लिए अदालत में झूठी गवाही देना पुणे के व्यवसायी सुरेश कुकरेजा को महंगा पड़ सकता है। शिवानी हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त आरके शर्मा के दोस्त सुरेश कुकरेजा को अदालत ने झूठी गवाही देने के आरोप में कारण बताआ॓ नोटिस जारी किया है। यदि दोष सिद्ध होता है तो कुकरेजा को सात साल तक कड़ी कैद व जुर्माने दोनों की सजा हो सकती है। सरकारी पक्ष का दावा था कि सुरेश कुकरेजा के मोबाइल फोन से ही आरके शर्मा ने शिवानी की हत्या की साजिश के लिए अन्य अभियुक्तों से बातचीत किया करता था। इस मामले में अदालत ने सुरेश कुकरेजा को आईपीसी की धारा 181 व 193 के तहत कारण बताआ॓ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उस पर अदालत में शपथ लेकर झूठी गवाही देने के आरोप में मुकदमा चलाया जाए। पुलिस अफसर ने डांटा रविकांत को सहारा न्यूज ब्यूरो नई दिल्ली, 20 मार्च। जब बुरा वक्त आता है तो साया भी साथ छोड़ जाता है। यही सबकुछ पत्रकार शिवानी भटनागर के हत्यारे आईपीएस अधिकारी आरके शर्मा के साथ भी आज कोर्ट में हुआ। चार दिन पहले तक जो पुलिस अफसर उससे अदब से पेश आते थे, आज वहीं पुलिस अधिकारी भरी अदालत में उसे डांट पिलाकर अभियुक्त होने अहसास करा दिया। शर्मा को दो दिन पहले ही अदालत ने दोषी करार दिया है। अदालत की कार्रवाई समाप्त होने के बाद आरके शर्मा अदालत के कमरे में बैठकर अपने वकील से बात करने लगे। कुछ देर बाद एक पुलिस अधिकारी उसे लॉकअप में चलने को कहा तो शर्मा ने जाने से इंकार कर दिया। इस पर उक्त पुलिस अधिकारी ने उसका हाथ पकड़ कर उसे चलने को लॉकअप में चलने को। इस पर आरके शर्मा ने उस पुलिस अधिकारी पर चीखते हुए कहा’ मैं नहीं जाऊंगा और मुझे यहीं बैठना है’। उसकी इस चीख का जवाब पुलिस अधिकारी ने चीखते हुए दिया और हाथ पकड़ कर कहा कि लॉकअप में चलना ही होगा। इसकी शिकायत बाद में उक्त पुलिस अधिकारी ने सम्बंधित न्यायाधीश से भी। हालांकि बाद में कोर्ट ने उसे अदालत कक्ष में ही बैठकर बात करने की अनुमति दे दी। इसके बाद करीब शर्मा करीब दो घंटे तक कोर्ट में ही बैठा रहा जबकि अन्य अभियुक्तों को लॉकअप में भेज दिया। सपना
टूटा, गरूर
नहीं
प्रभात
कुमार फैसले के
बाद
मुस्कराते
हुए शर्मा
अपनी पैंट की
जेब में हाथ
डाले शान से
अदालत से
बाहर निकला
और जेल की
गाड़ी में
अगली सीट पर
बैठकर जेल के
लिए रवाना हो
गया। इस
दौरान किसी
पुलिसवाले
ने उसे हाथ
लगाने की
जुर्रत नहीं
की, जबकि
दोषी करार
दिए गए अन्य
अभियुक्तों
को एक नहीं
दो-दो जवान
कस कर जकड़े
हुए थे।
शर्मा को जिस
समय कोर्ट
में पेश किया
गया वह तनाव
में था,
लेकिन फैसले
के बाद ही
उसका तनाव
जाता रहा।
गुलाबी कलर
की टी-शर्ट
पहने शर्मा
जब कोर्ट से
बाहर निकला
तो वहां
मौजूद उसकी
बहन गले लगकर
रोने लगी।
शर्मा ने बहन
को धैर्य
रखने की सलाह
देते हुए कहा
कि जज ने
सस्ता
प्राचार
पाने के लिए
उसे दोषी
करार दिया
है। शर्मा ने
बहन को चुप
कराते हुए
कहा कि सब
ठीक हो जाएग।
अदालत के
कमरे से बाहर
निकलते ही
उसने अपने
कुछ नजदीकी
लोगों से हाथ
मिलाया और
अदालत के
लॉकअप की आ॓र
बढ़ गया। किसी
पुलिसवाले
ने उसे हाथ
लगाने की
जुर्रत नहीं
की। पुलिस
वाले उससे
कुछ दूरी
बनाकर ही चल
रहे थे। न शिवानी के रिश्तेदार आए न शर्मा का परिवार इसे सामाजिक मान-मर्यादा का भय कहें या फिर कोई मजबूरी! शिवानी हत्याकांड में फैसले के दौरान न तो आरके शर्मा की पत्नी व बेटी अदालत में पहुंचे और न ही शिवानी के रिश्तेदार। शर्मा की पत्नी व बेटियां जो कई साल से हर सुनवाई पर उसके साथ खड़ी दिखाई देती थीं, वह भी अदालत में नहीं दिखीं। शिवानी भटनागर के मायके एवं ससुराल के भी कोई रिश्तेदार अदालत में नहीं थे। हालांकि शिवानी के परिवार से पहले भी कभी –कभार ही कोई रिश्तेदार अदालत पहुंचता था। आरके शर्मा की पत्नी मधु शर्मा एवं बेटी का अदालत में उपस्थित न होना चर्चा का विषय रहा। उन्हें इस फैसले का आभास हो गया था, इसलिए वे लोग अदालत नहीं पहुंचे। एक वजह यह भी बतायी जा रही है कि मधु शर्मा शुरू से ही मीडिया को कोसती रहीं और आरोप लगाती रही कि मीडिया इस मामले को तूल दे रहा है। जब उसे आभास हो गया कि फैसला उसके खिलाफ आने वाला है तो मीडिया से बचने के लिए वह अदालत ही नहीं पहुंची। शर्मा के अन्य रिश्तेदार व हरियाणा पुलिस के उनके नजदीकी लोग मौजूद थे।शर्मा ने सब कुछ भगवान पर छोड़ा इंसान कितना भी कुछ करे लेकिन जब किसी मुश्किल में होता है तो हारकर ईश्वर की शरण में जाता है। फैसले के बाद यही अभियुक्त आरके शर्मा ने भी किया। कोर्ट से जेल जाने के बाद वहां वह ईश्वर की प्रार्थना में लीन हो गया। जिन आरोपों के तहत उसे दोषी करार दिया गया है उसके तहत उसे अधिकतम मौत की सजा हो सकती है। जबकि कम से कम आजीवन कारावास। मौत की सजा न हो इसके लिए कोर्ट से जेल जाते ही शर्मा ईश्वर की प्रार्थना में लीन हो गया। जेल सूत्रों ने बताया कि कोर्ट से आने के बाद उसने अन्य कैदियों से बातचीत नहीं की और धार्मिक ग्रंथों को पढ़ना शुरू कर दिया। अब शर्मा एवं अन्य को जेल कानून के तहत जेल की वर्दी दी जाएगी। पंचकूला में शर्मा की कोठी पर सन्नाटा
जब आरके शर्मा पर यह मामला चला था तो मधु शर्मा मीडिया की सुर्खियों में रही थीं। उन्होंने अपने पति की पैरवी करने के लिए प्रेस वालों से भी काफी तालमेल बना रखा था। उस समय आरके शर्मा की दो बेटियों ने भी अपने पिता को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उनके पिता पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है। करीब नौ वर्ष तक चले इस मामले में कई उतार-चढ़ाव भी आए। एक बारगी तो उनके परिवार को भी यह लगने लगा था कि आरके शर्मा इस मामले में बरी हो जाएंगे। पंचकूला स्थित उनके कोठी के आसपास रहने वाले लोग भी इस मामले में कुछ बोलते को तैयार नहीं हैं। किसकी क्या भूमिका थी आरके शर्मा : आरके शर्मा ने अन्य अभियुक्तों के साथ साजिश रची और वारदात को अंजाम दिया। इसके लिए शर्मा ने अपने अधीन काम कर चुके हरियाणा पुलिस के एक थाना अध्यक्ष के बेटे श्रीभगवान से पहले मदद ली। श्रीभगवान : आरके शर्मा के कहने पर श्रीभगवान ने अपने एक रिश्तेदार सत्यप्रकाश का हायर किया और शिवानी की हत्या की साजिश रची। सत्यप्रकाश : सत्यप्रकाश ने हत्या लिए अपने एक रिश्तेदार प्रदीप शर्मा से संपर्क किया। उसे नौकरी का प्रलोभन देकर काम करने के लिए मनाया। प्रदीप शर्मा : प्रदीप शर्मा ने 23 जनवरी को शादी का कार्ड एवं मिठाई का डब्बा देने के बहाने शिवानी के घर गया। जब शिवानी उसके लिए चाय बनाने किचन में गई उसी समय प्रदीप ने पीछे से उस पर वार कर दिया। हत्या में तावा व बिजली का तार प्रयोग किया गया। कहां रची गई साजिश शिवानी की हत्या का साजिश अशोका होटल में रची गई। शर्मा होटल में सरकारी मीटिंग के बहाने ठहरा था । उस दिन शर्मा ने शिवानी को भी मिलने के लिए होटल में बुलाया और वहीं उसे आरोपितों को उसे दिखाया। पीछा छुड़ाने के लिए हुई थी हत्या शिवानी भटनागर की हत्या के पीछे सेंट किट्स मामले की गोपनीय दस्तावेज नहीं, बल्कि आरके शर्मा से उसका अवैध संबंध था। अभियोजन पक्ष के इस दलील को आज अदालत ने भी स्वीकार किया है। कोर्ट ने माना कि शिवानी की हत्या इसलिए नहीं की गई कि आरके शर्मा को प्रधानमंत्री कार्यालय से गोपनीय दस्तावजे लीक करने का भय था, बल्कि अभियुक्त ने उससे पीछा छुड़ाने के लिए हत्या करवाई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में शुरू से यह कहता रहा है कि मृतक शिवानी भटनागर का अभियुक्त आरके शर्मा से अवैध सम्बंध था लेकिन संबंध तब बिगड़ गये जब शिवानी ने अक्टूबर 1998 में बेटे को जन्म दिया। शर्मा प्रधानमंत्री कार्यालय में विशेष कार्य अधिकारी रहते हुए शिवानी को सेंट किट्स घोटाले से सम्बंधित गोपनीय दस्तावेज दिया था लेकिन शर्मा ने जब शिवानी से दूरी बनाना शुरू कर दिया तो उसने दस्तावेज को सार्वजनिक कर उसे बर्बाद करने की धमकी दी। लस्सी पीकर मनाई बरी होने की खुशी बहुचर्चित शिवानी भटनागर हत्याकांड में बरी हुए वेदप्रकाश शर्मा व वेदप्रकाश उर्फ कालू ने बरी होने की खुशी लस्सी पीकर मनाई। हालांकि वेदप्रकाश व कालू के चेहरे पर चमक तो अदालत द्वारा उनके बरी होने की घोषणा करते ही आ गयी थी लेकिन उनके चेहरे पर हंसी आरके शर्मा व दूसरे आरोपितों के अदालत से बाहर जाने के बाद ही आ पायी। अफरा-तफरी के माहौल के बीच जैसे ही सभी अरोपितों को अदालत में लाया गया तो सभी आरोपित तनाव मेें थे। हालांकि निलंबित आईपीएस आरके शर्मा व प्रदीप जरूर अपने आपको बेफिक्र दिखाने की कोशिश कर रहे थे। अदालत ने फैसला सुनाने से पहले सभी आरोपितों के नाम पुकारे व फैसला सुनाने के लिए फाईल खोली तो सभी आरोपितों ने अपनी आंखें बंद कर ली शायद भगवान से अपनी पैरवी करने की गुजारिश कर रहे थे। लेकिन अदालत के फैसला सुनाने के बाद वेदप्रकाश व कालू का चेहरा चमक उठा। हालांकि दूसरे आरोपितों की आ॓र देखकर यह वेदप्रकाश व कालू ने जल्द ही अपने चेहरे के भाव बदले व आरके शर्मा सहित दूसरे अभियुक्तों को दिलासा देने लगे। लेकिन पुलिस द्वारा आरके शर्मा सहित चारों आभियुक्तों को अदालत से बाहर ले जाते ही वेदप्रकाश व कालू के चेहरे पर हंसी आ गयी व एक दूसरे को गले लग कर बधाई दी। इसके बाद दोनों अपने परिचितों के साथ अदालत की कैंटीन में चले गए व मीठी लस्सी पी। घटनाक्रम
मोबाइल फोन बना शर्मा के गले की फांस नई दिल्ली। मोबाइल फोन पर शिवानी से लम्बी–लम्बी बातें करना आर के शर्मा के लिए आज मुसीबत बन गया। मोबाइल फोन पर उसकी बातों ने ही उसे दोषी ठहराने में अहम भूमिका निभायी। कोर्ट ने जिन साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त आरके शर्मा एवं अन्य को दोषी ठहराया है उनमें फोन कॉल के डिटेल को अहम माना गया। अदालत ने अपने निर्णय में अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपित शर्मा व मृतक शिवानी के बीच फोन पर हुई बातचीत अहम आधार साक्ष्य मानते हुए शर्मा एवं अन्य को दोषी करार दिया। |
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